Wednesday, October 31, 2012

hr khwab mein didaar tumhara ho,
main jo dekhun wo nazaara bs tumhara ho,
aisa waisa jaisa bhi ho bs sath tumhara ho,
hathon mein bs hath tumhara ho...

Monday, October 29, 2012

wafa....

uski tu parwaah na kr ho koi bhi wo pr tera apna na tha
,mehrbaan thi kismat tujh pr jo tujhse wafa kr gayi,
warna pyaar ka dard to bewafa hota hai...

Saturday, October 13, 2012

kuch aur tha.....

मेरे लिए तू कुछ और था ,
तेरे लिए मैं कुछ और था 
पर वो ज़माना कुछ और था,
मैं कुछ नहीं तेरे लिए 
तू कुछ नहीं मेरे लिए 
अब कुछ और तब कुछ और था।।।।

Wednesday, September 26, 2012

betiya...

sach hai chain milta hai maa baap ko beti ki muskan se,
uske pure hote armaan se aur uski apni pahchaan se....
maa baap ki parchhayi hi lekr ghar apna sajati hai betiya 
apno ko apno se milati hai betiya,
saaya apna hi dikhati hai betiya,
sach hai ghar ko sajati hai betiya,
apnepan ko bdhati hai betiya....

Friday, September 14, 2012

व्यस्त ज़िन्दगी से अपने लिए कुछ फुरसत के पल चुरा के देखो,

झूठ के परदे से बाहर जाकर देखो ,पराये को अपना बना के देखो ,
दुश्मन तो बहुत बनेंगे तुम्हारे पर ,उन्ही को  दोस्त बना कर देखो, 
इस व्यस्त ज़िन्दगी से अपने लिए कुछ फुरसत के पल चुरा के देखो,
                                                         
                                                नफरत तो बहुत है दुनिया में पर प्यार फैला के देखो 
                                                 बस एक बार अपनों से ये दूरिया घटा के तो देखों,
                                               मिल जायेंगे खुद बखुद रास्ते बस एक पग बढ़ा के देखों  

व्यस्त ज़िन्दगी से अपने लिए कुछ फुरसत के पल चुरा के देखो,
                                              
                                               इस राहे जिंदगी में सपने तो सबने देखे बहुत है 
                                              आओ उन सपनो की तरफ एक कदम बढ़ा के  देखें 
                                              अपने लिए तो सब सजाते किसी और के सपने सजा के देखें 

व्यस्त ज़िन्दगी से अपने लिए कुछ फुरसत के पल चुरा के देखो.....

Thursday, August 30, 2012

अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है,

हर इम्तहान मेरे लिए ही क्यों है,
हर प्रश्न मेरे लिए ही क्यों है है,
अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है,     
                                               बेटे की इच्छा करते है सब ,
                                               बेटे के लिए पूजा करते है सब,
                                                बेटी होना इतना बुरा क्यों है,
  अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है                                               
                                                हर सेवा करती है बेटी,
                                                हर पल साथ निभाती है बेटी 
                                                फिर भी हर पल मरी जाती है बेटी, 
   अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है                                               
                                                 देती है जनम जगत को बेटी ,
                                                 पर अस्तित्व को अपने ही खोती है बेटी            
                                                 सबकी सुनती है अपनी कुछ नहीं कहती है      
अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है  
                                                पत्नी हूँ   मैं ,बेटी हूँ मैं,माँ हूँ मैं,                                     
                                                बहू हूँ मैं ,देवी हूँ हैं ,अन्नपुर्णा हूँ मैं ,
                                                तुम कहते हो सब कुछ हूँ मैं ,
                                                पर जब सब कुछ हूँ बेटी 
                                                तो तुम पर इतनी भारी क्यों हूँ 
अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों  है 
                                              बंनाते  हैं घर की लक्ष्मी मुझे ,
                                              पर अस्मत को रौदते है वही ,
                                              जो माँ जीवन देती है,उसी को तौलते तुम्ही 
अगर ऐसा है तो ऐसा क्यूँ  है 
                                              रात के सन्नाटे में चीत्कार बेटी की है 
                                              खिलौना नहीं है ,फिर भी खिलौना है 
                                              अँधेरो में रोती है ,जलती बुझती है बेटी 
  अगर ऐसा है है तो ऐसा क्यूँ है 

Wednesday, February 15, 2012

मेरी आवाज़ हो तुम ..


                                                    मेरी आवाज़ हो तुम .....
 

पलकों पर सजे जो वो ख्वाब हो तुम ,जब  भी मैं  खामोश हूँ तब  मेरी आवाज़ हो तुम..
जब अंधेरों में पाती हूँ तनहा खुद को कभी ,तब जो होता है रोशन वो आफ़ताब हो तुम....
        
                मेरी हर सोच में हो शामिल ,मेरे ख्यालात हो तुम 
                सावन की पहली फुहार ,और बूदों के मल्हार हो तुम
                कह देती हूँ तुमसे जो वो हर अल्फाज़ हो तुम 
                 दूर ही सही पर मेरे बहुत पास हो तुम  
 
पलकों पर सजे जो वो ख्वाब हो तुम ,जब  भी मैं  खामोश हूँ तब  मेरी आवाज़ हो तुम..
जब अंधेरों में पाती हूँ तनहा खुद को कभी ,तब जो होता है रोशन वो आफ़ताब हो तुम....

                साँसों की सरगम में घुल से जाते राग हो तुम                
                मेरा संगीत मेरी आवाज़ , मेरा सुर मेरा साज़ हो तुम 
                जो हर पल गुनगुनाती हूँ वो राग हो तुम 
                 हाँ हर पल में मेरी आवाज़ हो तुम ......
               

Friday, June 10, 2011

dua.....

कुछ असर दुआओ का ऐसा होता  है जनाब,
जो किस्मत को पलट कर रख देता है क्युकी 
खुदा क्या करे वो आशिक ही है अपने बन्दों का,
सिर्फ बन्दों के एक आसू पर क़यामत भी ला देता है ...

Thursday, May 26, 2011

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी......

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,

उन गलियों से गुजरते है हम अब भी ,
जहाँ कभी साथ तुम्हारे चलते थे हम भी,
अब उन गलियों में जाने से डरते है हम अब भी

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,


हर बार झूठी कसम खाते है उन गलियों में न जाने की
पर हर बार उन गलियों में जा कर ,
तुम्हें खोजती है ये आखें आज भी
  
रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,

उन खूबसूरत चौराहों से गुजरते है हम जब भी ,
तुम अहसास बन आ ही जाते हो अब भी,
खुदा की कसम हर बार मर के जीते है हम अब भी 

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी....

Friday, April 29, 2011

कई बार.......

पलकों की चिलमन से छुपकर देखा है मैंने तुम्हे कई बार ,
अपनी सांसो  की सरगम में मैंने सुना है तुमको हर बार, कई बार,
अपने हाथो को उठा कर उस खुदा से की है दुआए तुम्हारे लिए हर बार,कई बार,
अहसासों की घनी  बस्ती मैंने सजायी है मन मैं इस बार,पहली बार,
जो मन मैं बनायीं है वो सुंदर छवि वो तुम्हारी है पहली और आखरी बार,
तुम्हारी बातो का है ये असर की मैंने खुद को पाया है ऐसे ,जैसा कभी  खुद को न सोचा था  ,
सपना ऐसा दिखाया है तुमने,हमें खुद से मिलवाया है  तुमने इस बार ......



Monday, April 4, 2011

किसी का इंतजार करना मुश्किल नहीं......

किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है ,
दुनिया  की  भीड़  में जो  ना करे  कभी  तनहा ,वो  कोई  खास  शख्स  तो  अपना हो,
माना की दुनिया का एक अपना दस्तूर है ,पर दुनिया पर भी किसी का सुरूर है ,
शब्दों को सहेज कर अरमानो को  सजाया है हमने ,हर बात में अपनी छुपाया है तुमको ,
मेरे सारे लफ्जों में अहसास तुमारा है ,मेरा हर गीत तुम्हारा है ,मेरा हर साज़  तुम्हारा है ,

किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है...

जो सपने मैंने बुने है अपने अंतर्मन में ,उन सपनो के हर तार में एक अरमान तुम्हारा है ,
जितना सोचा है मैंने जाना है हर वो अहसास तुम्हारा है ,खुद बन जाते हो अहसास मेरे,
अब हर सपना बस तुम्हारा है ,मन में खिले पुष्पों का हर हार अब तुम्हारा है ,
किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है...




Tuesday, March 22, 2011

प्यार तो एक समुन्द्र ....

 '' जनाब प्यार  तो  एक  समुन्द्र  है  जितना  डूबोगे  गहराई  उतनी  मिलेगी ,बस समझ  का  फेर  है  किसी  को  रब  इसमे  दिखता है  तो  किसी  को  हास्य  नज़र  आता  ,पर  सच  तो  ये  है  ये  वो  है  जो  पथेर में  जान  दाल  जाता  है ,.बस  पहचान  लो  उसको  ,जान  लो  उसको  हर  मोड़  पर  ये  नहीं  होता  पर  जब  होता  तो  जिन्दगी  मोड़  जाता  है  ,ये  वो  सूरज  है  जो रोशनी  दूसरो को  देकर  खुद जलता  रह  जाता  है ......."

Sunday, March 20, 2011

नयी झंकार....

मन में एक नयी झंकार तो है ,जीवन में एक नया उल्लास तो है ,
खुशियों से दामन को अपने सजाने की एक ख्वाहिश सी जगी मन में ,
तुम्हारे आने से एक कलि तो खिली है ,अहसास कुछ तो हुआ है जरुर 
तुम्हारी जिन्दगी में कुछ खुशियों की फुलवारी तो सजी है ,
खुश हूँ तुम्हारी खुशी से इतनी मैं की जीने की आस सी जगी है ,
तुम्हारे दमन में जो खुशिया आई है ,उसको अहसास तो मैंने कर लिया है,
बस बनी रहे यूँ ही खुशिया हर दम ,ये दुआ है मेरी जिन्दगी रंगों से सजी रहे तुम्हारी .......

Tuesday, March 15, 2011

कसक...

एक कसक सी दिल दिल में उठती रही ,लब को मुस्कुराना सिखा दिया था हमने ,
पर आखें रोती रही,उनके जाने का गम तो था पर अपना है वो इतना तो करार था ,
पर बीच में ख़ामोशी कुछ ऐसी रही की हम हर तराना ही भूल गए ,
दर्द का दरिया दिल में छुपा ही लिया था हमने ,पर एक लहर ऐसी उठी की नैनो को भिगो दिया ,
चहेरे पर ओढ़ ली थी हमने एक चिलमन मुस्कान की ,पर आज एक कसक फिर ऐसी उठी की ,
मुस्कान की ओ झूठी चिलमन कही खो सी गयी ,फिर याद आया की हमने कुछ खो दिया.......

Wednesday, March 2, 2011

इच्छाए...

कुछ शांत सी  कुछ अशांत सी इच्छाए'
कुछ प्रह्स्फुटित करती,कुछ दमित इच्छाए
कुछ खोती और  पाती इच्छाए '
                                                          कुछ हसाती कुछ रुलाती इच्छाए 
                                                          कुछ बतायी और कुछ छुपायी इच्छाए 
                                                          कुछ सवारती और कुछ बिगाडती इच्छाए 
कुछ कालान्त और कुछ पारसंगिक इच्छाए
कुछ स्याह और कुछ उज्जवल इच्छाए 
कुछ मुझे सताती और कुछ रुलाती इच्छाए 
                                                               
                                                               कुछ मुझे सवारती इच्छाए और कुछ को मैं सवारती
                                                                कुछ मुझे जोडती और कुछ मुझे तोडती इच्छाए 
                                                               कुछ मैं तोडती और कुछ जोडती इच्छाए 
जीवन का सार है और आधार ये इच्छाए 
माना सीमान्त नहीं है इच्छाओ का कोई
पर जीवन को एक पल में बिता देती है ये इच्छाए...      
"ऐतबार तो हो जाता है ,उनकी बस एक मुस्कान पर ,
खुदा की कसम हमने खुद को संभाला तो बहुत था,
बस उनकी नजरो के उस अनकहें अहसास ने कमाल कर दिया "  

Saturday, February 26, 2011

फ़ासला..

होता  है  यूँ  ही  जिन्दगी  के  साथ  कभी  कभी  ,
रोशनी  तो  फैलती है  ज़माने  में  पर  दिल  में  अँधेरा  ही  रह  जाता  है ,
जरुरत  तो  उनकी  रहती  है  हमे  हर  दम  ,
बस  दर्मिया  फ़ासला सा  कुछ  रह  जाता  है ..........

Monday, February 21, 2011

काश......

कही तो कोई ऐसा हो जो मेरा अपना हो ,
मेरी हर दुःख परेशानी को वो अपना कहता ,
मेरे सपनो को सजाता और सवारता,
मेरी आखो में जो ये गम का समुन्दर है,
इसे कोई ऋषि अगस्तय बन पी जाता ,
जो हर गम से बचा लेता मुझको  ,
दुनिया से लड़ कर मुझको अपना बना लेता वो,
काश कोई ऐसा होता जो जिन्दगी में आकर कभी,
यूँ तनहा अकेला ना कर जाता मुझको ........

Sunday, February 20, 2011

अहसास...

दिल ये न जाने किस मुकाम पर है, जब वो पास थे तो उनसे अलग होने का अहसास ही न था, 

अब जब वो दूर है तो उन्हें छुने को दिल  करता है , सिमट के उनके बाजुओ में रोने को दिल करता 

है..........न जाने  क्यू अब इस दुनिया को भुलाने को दिल करता है........

क्यों....

हमेशा अपनी ही खुशियों को क्यों आग लगाती है बेटिया,अपने ही सपनो को भुला देती है बेटिया,


कभी दहेज़ तो कभी  इज्जत के  नाम  पर  जला  दी  जाती  है  बेटिया 


क्यों हमेशा खुद को और अपने सपनो को खो देती है बेटिया......