Thursday, May 26, 2011

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी......

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,

उन गलियों से गुजरते है हम अब भी ,
जहाँ कभी साथ तुम्हारे चलते थे हम भी,
अब उन गलियों में जाने से डरते है हम अब भी

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,


हर बार झूठी कसम खाते है उन गलियों में न जाने की
पर हर बार उन गलियों में जा कर ,
तुम्हें खोजती है ये आखें आज भी
  
रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,

उन खूबसूरत चौराहों से गुजरते है हम जब भी ,
तुम अहसास बन आ ही जाते हो अब भी,
खुदा की कसम हर बार मर के जीते है हम अब भी 

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी....

Friday, April 29, 2011

कई बार.......

पलकों की चिलमन से छुपकर देखा है मैंने तुम्हे कई बार ,
अपनी सांसो  की सरगम में मैंने सुना है तुमको हर बार, कई बार,
अपने हाथो को उठा कर उस खुदा से की है दुआए तुम्हारे लिए हर बार,कई बार,
अहसासों की घनी  बस्ती मैंने सजायी है मन मैं इस बार,पहली बार,
जो मन मैं बनायीं है वो सुंदर छवि वो तुम्हारी है पहली और आखरी बार,
तुम्हारी बातो का है ये असर की मैंने खुद को पाया है ऐसे ,जैसा कभी  खुद को न सोचा था  ,
सपना ऐसा दिखाया है तुमने,हमें खुद से मिलवाया है  तुमने इस बार ......



Monday, April 4, 2011

किसी का इंतजार करना मुश्किल नहीं......

किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है ,
दुनिया  की  भीड़  में जो  ना करे  कभी  तनहा ,वो  कोई  खास  शख्स  तो  अपना हो,
माना की दुनिया का एक अपना दस्तूर है ,पर दुनिया पर भी किसी का सुरूर है ,
शब्दों को सहेज कर अरमानो को  सजाया है हमने ,हर बात में अपनी छुपाया है तुमको ,
मेरे सारे लफ्जों में अहसास तुमारा है ,मेरा हर गीत तुम्हारा है ,मेरा हर साज़  तुम्हारा है ,

किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है...

जो सपने मैंने बुने है अपने अंतर्मन में ,उन सपनो के हर तार में एक अरमान तुम्हारा है ,
जितना सोचा है मैंने जाना है हर वो अहसास तुम्हारा है ,खुद बन जाते हो अहसास मेरे,
अब हर सपना बस तुम्हारा है ,मन में खिले पुष्पों का हर हार अब तुम्हारा है ,
किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है...




Tuesday, March 22, 2011

प्यार तो एक समुन्द्र ....

 '' जनाब प्यार  तो  एक  समुन्द्र  है  जितना  डूबोगे  गहराई  उतनी  मिलेगी ,बस समझ  का  फेर  है  किसी  को  रब  इसमे  दिखता है  तो  किसी  को  हास्य  नज़र  आता  ,पर  सच  तो  ये  है  ये  वो  है  जो  पथेर में  जान  दाल  जाता  है ,.बस  पहचान  लो  उसको  ,जान  लो  उसको  हर  मोड़  पर  ये  नहीं  होता  पर  जब  होता  तो  जिन्दगी  मोड़  जाता  है  ,ये  वो  सूरज  है  जो रोशनी  दूसरो को  देकर  खुद जलता  रह  जाता  है ......."

Sunday, March 20, 2011

नयी झंकार....

मन में एक नयी झंकार तो है ,जीवन में एक नया उल्लास तो है ,
खुशियों से दामन को अपने सजाने की एक ख्वाहिश सी जगी मन में ,
तुम्हारे आने से एक कलि तो खिली है ,अहसास कुछ तो हुआ है जरुर 
तुम्हारी जिन्दगी में कुछ खुशियों की फुलवारी तो सजी है ,
खुश हूँ तुम्हारी खुशी से इतनी मैं की जीने की आस सी जगी है ,
तुम्हारे दमन में जो खुशिया आई है ,उसको अहसास तो मैंने कर लिया है,
बस बनी रहे यूँ ही खुशिया हर दम ,ये दुआ है मेरी जिन्दगी रंगों से सजी रहे तुम्हारी .......

Tuesday, March 15, 2011

कसक...

एक कसक सी दिल दिल में उठती रही ,लब को मुस्कुराना सिखा दिया था हमने ,
पर आखें रोती रही,उनके जाने का गम तो था पर अपना है वो इतना तो करार था ,
पर बीच में ख़ामोशी कुछ ऐसी रही की हम हर तराना ही भूल गए ,
दर्द का दरिया दिल में छुपा ही लिया था हमने ,पर एक लहर ऐसी उठी की नैनो को भिगो दिया ,
चहेरे पर ओढ़ ली थी हमने एक चिलमन मुस्कान की ,पर आज एक कसक फिर ऐसी उठी की ,
मुस्कान की ओ झूठी चिलमन कही खो सी गयी ,फिर याद आया की हमने कुछ खो दिया.......

Wednesday, March 2, 2011

इच्छाए...

कुछ शांत सी  कुछ अशांत सी इच्छाए'
कुछ प्रह्स्फुटित करती,कुछ दमित इच्छाए
कुछ खोती और  पाती इच्छाए '
                                                          कुछ हसाती कुछ रुलाती इच्छाए 
                                                          कुछ बतायी और कुछ छुपायी इच्छाए 
                                                          कुछ सवारती और कुछ बिगाडती इच्छाए 
कुछ कालान्त और कुछ पारसंगिक इच्छाए
कुछ स्याह और कुछ उज्जवल इच्छाए 
कुछ मुझे सताती और कुछ रुलाती इच्छाए 
                                                               
                                                               कुछ मुझे सवारती इच्छाए और कुछ को मैं सवारती
                                                                कुछ मुझे जोडती और कुछ मुझे तोडती इच्छाए 
                                                               कुछ मैं तोडती और कुछ जोडती इच्छाए 
जीवन का सार है और आधार ये इच्छाए 
माना सीमान्त नहीं है इच्छाओ का कोई
पर जीवन को एक पल में बिता देती है ये इच्छाए...