Thursday, August 30, 2012

अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है,

हर इम्तहान मेरे लिए ही क्यों है,
हर प्रश्न मेरे लिए ही क्यों है है,
अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है,     
                                               बेटे की इच्छा करते है सब ,
                                               बेटे के लिए पूजा करते है सब,
                                                बेटी होना इतना बुरा क्यों है,
  अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है                                               
                                                हर सेवा करती है बेटी,
                                                हर पल साथ निभाती है बेटी 
                                                फिर भी हर पल मरी जाती है बेटी, 
   अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है                                               
                                                 देती है जनम जगत को बेटी ,
                                                 पर अस्तित्व को अपने ही खोती है बेटी            
                                                 सबकी सुनती है अपनी कुछ नहीं कहती है      
अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों है  
                                                पत्नी हूँ   मैं ,बेटी हूँ मैं,माँ हूँ मैं,                                     
                                                बहू हूँ मैं ,देवी हूँ हैं ,अन्नपुर्णा हूँ मैं ,
                                                तुम कहते हो सब कुछ हूँ मैं ,
                                                पर जब सब कुछ हूँ बेटी 
                                                तो तुम पर इतनी भारी क्यों हूँ 
अगर ऐसा है तो ऐसा क्यों  है 
                                              बंनाते  हैं घर की लक्ष्मी मुझे ,
                                              पर अस्मत को रौदते है वही ,
                                              जो माँ जीवन देती है,उसी को तौलते तुम्ही 
अगर ऐसा है तो ऐसा क्यूँ  है 
                                              रात के सन्नाटे में चीत्कार बेटी की है 
                                              खिलौना नहीं है ,फिर भी खिलौना है 
                                              अँधेरो में रोती है ,जलती बुझती है बेटी 
  अगर ऐसा है है तो ऐसा क्यूँ है 

Wednesday, February 15, 2012

मेरी आवाज़ हो तुम ..


                                                    मेरी आवाज़ हो तुम .....
 

पलकों पर सजे जो वो ख्वाब हो तुम ,जब  भी मैं  खामोश हूँ तब  मेरी आवाज़ हो तुम..
जब अंधेरों में पाती हूँ तनहा खुद को कभी ,तब जो होता है रोशन वो आफ़ताब हो तुम....
        
                मेरी हर सोच में हो शामिल ,मेरे ख्यालात हो तुम 
                सावन की पहली फुहार ,और बूदों के मल्हार हो तुम
                कह देती हूँ तुमसे जो वो हर अल्फाज़ हो तुम 
                 दूर ही सही पर मेरे बहुत पास हो तुम  
 
पलकों पर सजे जो वो ख्वाब हो तुम ,जब  भी मैं  खामोश हूँ तब  मेरी आवाज़ हो तुम..
जब अंधेरों में पाती हूँ तनहा खुद को कभी ,तब जो होता है रोशन वो आफ़ताब हो तुम....

                साँसों की सरगम में घुल से जाते राग हो तुम                
                मेरा संगीत मेरी आवाज़ , मेरा सुर मेरा साज़ हो तुम 
                जो हर पल गुनगुनाती हूँ वो राग हो तुम 
                 हाँ हर पल में मेरी आवाज़ हो तुम ......
               

Friday, June 10, 2011

dua.....

कुछ असर दुआओ का ऐसा होता  है जनाब,
जो किस्मत को पलट कर रख देता है क्युकी 
खुदा क्या करे वो आशिक ही है अपने बन्दों का,
सिर्फ बन्दों के एक आसू पर क़यामत भी ला देता है ...

Thursday, May 26, 2011

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी......

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,

उन गलियों से गुजरते है हम अब भी ,
जहाँ कभी साथ तुम्हारे चलते थे हम भी,
अब उन गलियों में जाने से डरते है हम अब भी

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,


हर बार झूठी कसम खाते है उन गलियों में न जाने की
पर हर बार उन गलियों में जा कर ,
तुम्हें खोजती है ये आखें आज भी
  
रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी,

उन खूबसूरत चौराहों से गुजरते है हम जब भी ,
तुम अहसास बन आ ही जाते हो अब भी,
खुदा की कसम हर बार मर के जीते है हम अब भी 

रहने को तो तेरे शहर में रहते है हम अब भी....

Friday, April 29, 2011

कई बार.......

पलकों की चिलमन से छुपकर देखा है मैंने तुम्हे कई बार ,
अपनी सांसो  की सरगम में मैंने सुना है तुमको हर बार, कई बार,
अपने हाथो को उठा कर उस खुदा से की है दुआए तुम्हारे लिए हर बार,कई बार,
अहसासों की घनी  बस्ती मैंने सजायी है मन मैं इस बार,पहली बार,
जो मन मैं बनायीं है वो सुंदर छवि वो तुम्हारी है पहली और आखरी बार,
तुम्हारी बातो का है ये असर की मैंने खुद को पाया है ऐसे ,जैसा कभी  खुद को न सोचा था  ,
सपना ऐसा दिखाया है तुमने,हमें खुद से मिलवाया है  तुमने इस बार ......



Monday, April 4, 2011

किसी का इंतजार करना मुश्किल नहीं......

किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है ,
दुनिया  की  भीड़  में जो  ना करे  कभी  तनहा ,वो  कोई  खास  शख्स  तो  अपना हो,
माना की दुनिया का एक अपना दस्तूर है ,पर दुनिया पर भी किसी का सुरूर है ,
शब्दों को सहेज कर अरमानो को  सजाया है हमने ,हर बात में अपनी छुपाया है तुमको ,
मेरे सारे लफ्जों में अहसास तुमारा है ,मेरा हर गीत तुम्हारा है ,मेरा हर साज़  तुम्हारा है ,

किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है...

जो सपने मैंने बुने है अपने अंतर्मन में ,उन सपनो के हर तार में एक अरमान तुम्हारा है ,
जितना सोचा है मैंने जाना है हर वो अहसास तुम्हारा है ,खुद बन जाते हो अहसास मेरे,
अब हर सपना बस तुम्हारा है ,मन में खिले पुष्पों का हर हार अब तुम्हारा है ,
किसी का  इंतजार  करना  मुश्किल नहीं दुनिया में ,पर  यकीन तो  हो  की  वो  अपना  है...




Tuesday, March 22, 2011

प्यार तो एक समुन्द्र ....

 '' जनाब प्यार  तो  एक  समुन्द्र  है  जितना  डूबोगे  गहराई  उतनी  मिलेगी ,बस समझ  का  फेर  है  किसी  को  रब  इसमे  दिखता है  तो  किसी  को  हास्य  नज़र  आता  ,पर  सच  तो  ये  है  ये  वो  है  जो  पथेर में  जान  दाल  जाता  है ,.बस  पहचान  लो  उसको  ,जान  लो  उसको  हर  मोड़  पर  ये  नहीं  होता  पर  जब  होता  तो  जिन्दगी  मोड़  जाता  है  ,ये  वो  सूरज  है  जो रोशनी  दूसरो को  देकर  खुद जलता  रह  जाता  है ......."